
तुम रणभूमी के योधा हो,
उठकर सीधा वार करो।
सूरज जब निकालेगा तब निकलेगा
तुम अंधेरे में हीं अभ्यास करो।
कण-कण तन मन
सब अपना तुम झोंका
ना नियति से कोई आस धरो।
लक्ष्य पाना हीं दुर्गम वय का हल है
लक्ष्य के आगे
हर कुछ का तुम परिहार करो।
तुम रणभूमी के योधा हो,
उठकर सीधा वार करो।
©Dr.Kavita






You must be logged in to post a comment.